बोड़ला रानीदहरा जलप्रपात: 2 दिनों में मृतिका की पहचान, 5 दिन के अंदर एक आरोपी पुणे से गिरफ्तार

अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा, 2 दिनों में मृतिका की पहचान, 5 दिन के अंदर एक आरोपी पुणे से गिरफ्तार
20 मार्च 2026 को रानीदहरा जलप्रपात के पास अज्ञात महिला का शव मिला
केवल 2 दिनों में मृतिका की पहचान कर मुंगेली निवासी होना स्थापित किया गया
महज 5 दिन के भीतर ही कबीरधाम पुलिस ने मुख्य आरोपी देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल को पुणे (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार किया गया
आरोपी द्वारा पिता एवं दोस्त के साथ मिलकर की गई सुनियोजित हत्या का खुलासा
अलग-अलग टीमों द्वारा तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल एवं फील्ड जांच कर प्रकरण सुलझाया गया
डमी पुतले के माध्यम से घटनास्थल पर सीन रिक्रिएट कर हत्या की पुष्टि की गई
TCN TIMES NEWS KAWARDHA: दिनांक 19 मार्च 2026 को रानीदहरा जलप्रपात के समीप एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना पर कबीरधाम पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच प्रारंभ की गई। प्रारंभ में मृतिका की पहचान पूरी तरह अज्ञात होने से मामला अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण था।
मामले में थाना बोड़ला में अपराध क्रमांक 34/2026, धारा 103(1), 238(क), 61(2) बीएनएस के अंतर्गत दर्ज कर कबीरधाम पुलिस द्वारा त्वरित एवं पेशेवर कार्यवाही करते हुए उल्लेखनीय सफलता अर्जित की गई है।
कबीरधाम पुलिस द्वारा त्वरित एवं पेशेवर कार्रवाई करते हुए मात्र 2 दिनों के भीतर ही मृतिका की पहचान कर ली गई, जो जिला मुंगेली की निवासी पाई गई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल एवं अमित पटेल तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) बोड़ला अखिलेश कौशिक के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक रूपक शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर बहुस्तरीय जांच प्रारंभ की गई।

मामले की गुत्थी सुलझाने हेतु अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन कर उन्हें विभिन्न कार्यों में लगाया गया। एक टीम द्वारा तकनीकी साक्ष्यों का संकलन कर कॉल डिटेल्स एवं लोकेशन का विश्लेषण किया गया, वहीं दूसरी टीम द्वारा घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में सघन पूछताछ करते हुए प्रत्यक्षदर्शियों एवं स्थानीय लोगों से महिला के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई गई।
पुलिस द्वारा लगातार की गई मेहनत, सूझबूझ एवं वैज्ञानिक जांच के आधार पर संदेहियों का दायरा सीमित किया गया, जिसके पश्चात देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। टीम को जानकारी प्राप्त हुई कि मुख्य आरोपी पुणे (महाराष्ट्र) में छिपा हुआ है, जिस पर तत्काल पुलिस टीम गठित कर पुणे रवाना किया गया।
कबीरधाम पुलिस की टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल को पुणे से गिरफ्तार कर विधिवत कबीरधाम लाया गया। आरोपी से पूछताछ में पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ, जिसमें उसने अपने पिता केषव प्रसाद जायसवाल एवं सहयोगी मनोज पटेल के साथ मिलकर हत्या करना स्वीकार किया। उनके द्वारा बताया गया कि दिनांक 16 मार्च को शाम 6 से 7 बजे के बीच घटना कारीत किया था।
पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि मृतिका सुखमती बैगा के साथ आरोपी का प्रेम संबंध था। समाज में बदनामी के भय से आरोपियों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र रचकर मृतिका को रानीदहरा जलप्रपात ले जाकर पत्थर से हमला कर हत्या की गई तथा साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को झरने में फेंक दिया गया।
पुलिस द्वारा आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर घटनास्थल पर डमी पुतले के माध्यम से घटना का सीन रिक्रिएट कराया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि किस प्रकार आरोपियों ने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। साथ ही आरोपियों के निशानदेही पर घटना से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किये गये हैं।
कबीरधाम पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई, तकनीकी दक्षता एवं टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इस अंधे हत्या प्रकरण का सफलतापूर्वक खुलासा कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपिगण का विवरण निम्नानुसार है –
1. देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल पिता केषव प्रसाद जायसवाल, उम्र 26 वर्ष, निवासी दरवाजा, चौकी खुड़िया, थाना लोरमी, जिला मुंगेली (छ.ग.)
2. केषव प्रसाद जायसवाल, पिता पुसउ राम जायसवाल निवासी दरवाजा, चौकी खुड़िया, थाना लोरमी, जिला मुंगेली (छ.ग.)
3. मनोज पटेल पिता सुमित पटेल, उम्र 32 वर्ष, निवासी निवासी दरवाजा, चौकी खुड़िया, थाना लोरमी, जिला मुंगेली (छ.ग.)
कबीरधाम पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें, जिससे अपराधों की रोकथाम एवं त्वरित खुलासा सुनिश्चित किया जा सके।
उक्त कार्यवाही में थाना बोड़ला की टीम द्वारा सराहनीय कार्य किया गया, जिसमें निरीक्षक रूपक शर्मा, सहायक उप निरीक्षक गोविंद चन्द्रवंशी, सहायक उप निरीक्षक प्रहलाद चन्द्रवंशी, प्रधान आरक्षक नन्हे नेताम, प्रधान आरक्षक वैभव कल्चुरी, सायबर सेल, प्रधान आरक्षक मनोज महोबिया, प्रधान आरक्षक उमाशंकर नाग, प्रधान आरक्षक कामता प्रसाद, प्रधान आरक्षक राजकुमार साहू , प्रधान आरक्षक रामचन्द्र चन्द्रवंशी (क्रमांक 383), आरक्षक घनश्याम पटेल, आरक्षक सुरेश धुर्वे, आरक्षक पूरन डाहिरे, सायबर सेल, आरक्षक अमित ठाकुर, सायबर सेल एवं प्रशिक्षु आबकारी उप निरीक्षक भूपत साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही जिनके अथक प्रयासों से यह जटिल एवं अंधा प्रकरण अल्प समय में सुलझाया जा सका।
