‘मोर अंगना के शोर’ के भव्य विमोचन में शिक्षक लक्ष्मण बांधेकर हुए सम्मानित..गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई पुस्तक.. कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप और विधायक अनुज शर्मा की गरिमामय उपस्थिति में हुआ आयोजन

TCN TIMES NEWS PANDRIYA: राजधानी रायपुर स्थित वृंदावन हॉल में सोमवार को साझा बाल काव्य संग्रह ‘मोर अंगना के शोर’ का भव्य विमोचन छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री माननीय केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी, भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ की प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. गीतादेवी तथा राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा उपस्थित रहीं।
चिन्हारी साहित्य समिति, छत्तीसगढ़ एवं साहित्य लेखन रिसोर्स शिक्षक परिवार के संयुक्त तत्वावधान में प्रकाशित इस बाल काव्य संग्रह का संपादन वीरेंद्र कुमार साहू ने किया है। पुस्तक को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में भी स्थान प्राप्त हुआ है। इसमें छत्तीसगढ़ के 25 जिलों के 48 नवाचारी शिक्षकों एवं साहित्यकारों की 121 स्वरचित बाल कविताओं का संकलन किया गया है।
इस पुस्तक में कबीरधाम जिले से विकासखंड पंडरिया अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला रहमान कापा के शिक्षक एवं साहित्यकार लक्ष्मण बांधेकर की दो बाल रचनाएँ ‘गिनती हमारी है निराली’ तथा ‘रंग-बिरंगे महकते फूल’ प्रकाशित हुई हैं। समारोह के दौरान लक्ष्मण बांधेकर को सहायक लेखक के रूप में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए मुख्य अतिथि के करकमलों से प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही कबीरधाम जिले के प्रधान पाठक शिवकुमार बंजारे तथा शिक्षक कमलेश लांझे की रचनाओं को भी पुस्तक में स्थान मिला है।

बालवाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस पुस्तक की विशेषता यह है कि प्रत्येक रचना के साथ एक QR कोड दिया गया है। इसे स्कैन कर बच्चे संबंधित रचनाकार की आवाज़ में कविता सुन सकते हैं। यह डिजिटल नवाचार दृष्टिबाधित बच्चों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
संपादक वीरेंद्र कुमार साहू ने बताया कि लगभग छह माह के सतत प्रयास से तैयार इस पुस्तक में हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा के 20 विषयों पर आधारित बालगीत एवं कविताओं का समावेश किया गया है। पुस्तक का निर्माण एफएलएन (FLN), नई शिक्षा नीति-2020 तथा समावेशी शिक्षा के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

समारोह में उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं शिक्षकों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे बाल साहित्य, मातृभाषा संवर्धन और शैक्षिक नवाचार की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक पहल बताया।


