चाक से लेकर डिजिटल लैब तक ,शिक्षा से लेकर समाज सेवा तक ,व्याख्याता तुलस की अनूठी यात्रा
20 वर्षों से शिक्षा को सेवा और नवाचार से जोड़ रहे व्याख्याता तुलस की पहल बनी मिसाल
TCN TIMES NEWS PANDRIYA: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कामठी के रसायन शास्त्र व्याख्याता तुलस राम चंद्राकर पिछले 20 वर्षों से शिक्षा को सेवा, नवाचार और सामाजिक सरोकार से जोड़कर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में उनके द्वारा अपने निजी संसाधन एवं निजी खर्च से डिजिटल केमिस्ट्री लैब तैयार की गई है, जो राज्य की पहली डिजिटल लैब है जिसके माध्यम से कठिन रसायन शास्त्र को प्रयोग, गतिविधि और डिजिटल तकनीक से सरल एवं रोचक ढंग बच्चे स्वयं सीखेंगे शिक्षक द्वारा रसायन की रोचक क्लास से पढ़ाया जा रहा है। ‘रसायन की अदालत’, ‘इलेक्ट्रॉन की रस्साकशी’ और ‘बैंगनी जादूगर’ जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की मदद भी उनकी प्राथमिकता रही है। पिछले छह वर्षों से अपने पिता की स्मृति में 200 से अधिक विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं-12वीं की पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करा चुके हैं। विद्यालय में ‘ज्ञानदीप योजना’ के माध्यम से भी जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा वे अपने वार्षिक वेतन से लगभग 15–20 हजार रुपये प्रतिवर्ष बच्चों को पुरस्कार, पेन, बैग एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री देकर उनके उत्साहवर्धन में खर्च करते हैं।
पिछले पाँच वर्षों में लगभग 22 ड्रॉपआउट बच्चों को ओपन माध्यम से पुनः शिक्षा से जोड़ने का प्रयास भी किया गया है। बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष नौ छात्राओं को कॉपी, पेन, पुस्तक, कम्पास बॉक्स और बैग प्रदान किए जाते हैं तथा बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को ₹1,001 की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाता है।
उनके द्वारा पढ़ाए गए विषयों में लगातार शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा है। रसायन शास्त्र के साथ हिंदी शिक्षण में भी वे नवाचार अपनाते हैं।
शिक्षा के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता और नशा मुक्ति के क्षेत्र में भी उन्होंने गाँव-गाँव जाकर जागरूकता अभियान चलाए हैं।
उनके नवाचारों को वर्ष 2022 में राज्यपाल पुरस्कार सहित राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उनका शैक्षणिक मॉडल ‘द टीचर ऐप’ पर शामिल हुआ है, वहीं ‘बच्चों की मन की बात’ नवाचार पुस्तक के रूप में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के विद्यालय में स्थापित है
शिक्षक द्वारा समाज सेवा में भी वृद्धजन का ,मजदूरों का विकलांग जनों का विशेष दिवस पर सम्मान करना










