फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के द्वारा
गिलोय औषधि रोपण एवम बीज संग्रहण कार्यकर्म किया गया,
फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी जिला मुंगेली महिला लिडर अमरबती बैगा, सीता बैगा के द्वारा राधिका महरा DRP मुंगेली और मास्टर ट्रेनर चांदनी पट्टा एवं प्रेनूका के सहयोग से।
*गिलोय औषधि रोपण एवं बीज संग्रहण कार्यक्रम – विस्तृत रिपोर्ट*
*दिनांक:* 20 जून 2026, शनिवार
*स्थान:* ग्राम सलगी ग्राम पंचायत बिजराकछार
*कार्यक्रम:* गिलोय औषधि रोपण, बीज संग्रहण एवं पर्यावरण संरक्षण संकल्प
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*1. कार्यक्रम का उद्देश्य*
1. *औषधीय पौधों का संरक्षण:* गिलोय जैसी महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक बेल का रोपण कर ग्रामीणों को औषधीय पौधों के महत्व से अवगत कराना।
2. *बीज बैंक की स्थापना:* आम, जामुन, नीम, कुसुम जैसे स्थानीय प्रजाति के बीजों का संग्रहण कर भावी पीढ़ी के लिए वृक्षारोपण हेतु आधार तैयार करना।
3. *पर्यावरण जागरूकता:* पेड़ों की कटाई रोकने एवं वनोपज संरक्षण हेतु सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना।
4. *महिला सशक्तिकरण:* महिला लीडर को वनोपज संग्रहण, बीज संग्रहण एवं स्वस्थ पेड़ों के अवलोकन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना।
*2. मुख्य गतिविधियाँ*
1 गिलोय रोपण पहाड़ी, जंगलों के किनारे एवं बाड़ी की तारबंदी पर गड्ढा खोदकर गिलोय की बेल लगाई गई। गिलोय को सहारे के लिए वृक्षों/तार का उपयोग बताया गया। बच्चे, महिला, पुरुष
2 **बीज संग्रहण जागरूकता** आम, जामुन, नीम, कुसुम के बीज संग्रहण का उद्देश्य समझाया गया। बरसात में इन बीजों से पौध तैयार करने की योजना बनाई। समस्त ग्रामीण
3 **महिला लीडर प्रशिक्षण** महिला लीडर को वनोपज संग्रहण कार्य, बीजों की पहचान, भंडारण विधि एवं स्वस्थ पेड़ का अवलोकन करने का अभ्यास कराया गया। महिला लीडर समूह
4 **पर्यावरण संकल्प** “पेड़ नहीं काटने” का सामूहिक निर्णय लिया गया। बच्चों ने अपने लगाए पेड़ों को भावी पीढ़ी के लिए बचाने का संकल्प लिया। बच्चों द्वारा विशेष उत्साह
*3. गिलोय रोपण का महत्व*
गिलोय को ‘अमृता’ भी कहा जाता है। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुखार, डायबिटीज, गठिया जैसी बीमारियों में अत्यंत उपयोगी है। ग्राम सलगी में इसे पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों एवं बाड़ी की मेड़ों पर लगाया गया ताकि:
1. प्राकृतिक रूप से इसका प्रसार हो सके।
2. बाड़ी की तारबंदी पर लगाने से फसल सुरक्षा के साथ औषधि भी मिलेगी।
3. ग्रामीणों को घरेलू उपचार हेतु आसानी से उपलब्ध हो।
*4. सामुदायिक सहभागिता एवं उत्साह*
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों ने समान रूप से भाग लिया।
– *बच्चे:* अत्यंत उत्साह से गड्ढा खुदाई, रोपण एवं “पेड़ बचाओ” का नारा लगाकर संकल्प लिया।
– *महिला लीडर:* बीज संग्रहण एवं वनोपज प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वीकार की। स्वस्थ पेड़ों की पहचान करना सीखा।
– *पुरुष वर्ग:* रोपण स्थल चयन, गड्ढा निर्माण एवं बेल को सहारा देने की व्यवस्था में सहयोग दिया।
सभी ने यह समझा कि बीज संग्रहण केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए “हरित विरासत” तैयार करना है।
*5. लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय एवं संकल्प*
1. *पेड़ नहीं काटने का निर्णय:* बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि पर्यावरण संतुलन हेतु हरे वृक्षों की कटाई नहीं की जाएगी।
2. *बीज बैंक निर्माण:* मानसून से पूर्व आम, जामुन, नीम, कुसुम के बीज एकत्र कर ग्राम स्तर पर बीज बैंक बनाया जाएगा।
3. *बच्चों का संकल्प:* प्रत्येक बच्चे ने एक-एक पेड़ को गोद लेकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी ली।
4. *महिला लीडर की भूमिका:* वनोपज संग्रहण एवं बीज वितरण का कार्य महिला समूह द्वारा संचालित किया जाएगा।
*6. निष्कर्ष एवं आगे की योजना*
20 जून 2026 को ग्राम सलगी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह “पर्यावरण चेतना” का सामुदायिक उत्सव बना। गिलोय रोपण से औषधीय संपदा बढ़ेगी, बीज संग्रहण से वृक्षारोपण को गति मिलेगी और बच्चों के संकल्प से पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
*आगामी कार्ययोजना:*
1. जुलाई माह में संग्रहित बीजों से सीड बॉल तैयार करना और चयनित स्थान पर लगाना।
2. महिला लीडर समूह द्वारा हर माह वृक्षों के स्वास्थ्य का अवलोकन। आजीविका संवर्धन।
3. विद्यालय स्तर पर “एक बच्चा-एक पेड़” अभियान शुरू करना।
4. गिलोय की वृद्धि एवं उपयोग पर 3 माह बाद समीक्षा बैठक।
यह पहल ग्राम सलगी को “औषधीय ग्राम” एवं “हरित ग्राम” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
नाम राधिका महरा DRP मुंगेली
चांदनी पट्टा मास्टर ट्रेनर



