पंडरिया स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना में नए प्रबंध संचालक के रूप में आशुतोष डडसेना की नियुक्ति का आदेश 9 सितम्बर को जारी हो चुका है। आदेश स्पष्ट है—फिर भी आज तक पदभार हस्तांतरण नहीं होना कई सवाल खड़े करता है..
TCN TIMES NEWS PANDRIYA: आशुतोष डडसेना अपने पूर्व स्थान से विधिवत रिलीव होकर ज्वाइनिंग के लिए आ चुके हैं और आवक-जावक में प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई है। इसके बावजूद वर्तमान प्रबंध संचालक द्वारा पद नहीं छोड़ना आखिर किस दबाव या स्वार्थ का परिणाम है?
कुछ लोग अपने निजी फायदे के लिए इस ट्रांसफर को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। पहले भी राकेश सिंह राजपूत का ट्रांसफर इसी तरह रोका गया था। बार-बार ऐसा होना सीधे-सीधे संदेह पैदा करता है कि आखिर इस कारखाने में चल क्या रहा है?
इधर सच्चाई यह है कि कारखाने के श्रमिक 8 महीने से वेतन के लिए तरस रहे हैं। पिछले हड़ताल समझौते , 3 वर्षों के हड़ताल बकाया भुगतान अब तक नहीं दिया गया। क्या इन श्रमिकों का कोई परिवार नहीं है? क्या उनकी मेहनत की कोई कीमत नहीं है?
एक तरफ श्रमिकों को उनका हक नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ ट्रांसफर रोकने की राजनीति हो रही है—यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।
..पहले श्रमिकों का बकाया वेतन और हड़ताल भुगतान तुरंत जारी किया जाए।
..स्थानांतरण जैसे प्रशासनिक आदेशों में अनावश्यक दखल बंद किया जाए।
..कारखाने में चल रही इस संदिग्ध स्थिति की निष्पक्ष जांच की जाए।
..अगर अब भी इस पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ माना जाएगा कि कहीं न कहीं बड़ी अनियमितता को बचाने की कोशिश हो रही है।
..श्रमिक चुप नहीं बैठेंगे—अपने हक के लिए आवाज और तेज होगी।










